विकास के युग में बालविवाह जैसी कुप्रथा चलती रही तो आनेवाली पीढ़ियां कभीमाफ नहींकरेगी नीरज गुप्ता

कोलायत 19 अप्रेल ।कोलायत के न्यायिक मजिस्ट्रेट नीरज गुप्ता ने कहा कि आखातीज के पवित्र दिन हम यह शुभ संकल्प लें कि समाज से तमाम बुराईयो को जड़ से उखाड़ फेंके। आज विकास के इस युग में भी यदि बाल विवाह जैसी कुप्रथा चलती रही तो आने तो आने वाली पीढ़ियां कभी हमें माफ नहीं करेगी। उन्होंने भी ग्रामीणों का आह्वान करता हूं कि आप आगे आएं और इस सामाजिक बुराई को जड़ से उखाड़ फेंके। बाल विवाह एक सामाजिक बुराई होने के साथ ही कानूनी अपराध है और हमें चाहिये कि इस अपराध से हम खुद तो बचे ही दूसरों को भी यह अपराध करने से रोकें दी। न्यायिक मजिस्ट्रेट नीरज गुप्ता ने कहा कि बाल विवाह को रोकने के लिए आगे आना होगा। नीरज गुप्ता ने कहा कि बाल विवाह को रोकने के लिए ग्रामीण न्यायालय मे अर्जी लिख कर दे सकते है जिससे बाल विवाह को समय रहते रोका जा सकें। उन्होंने एक तरीके का जिक्र करते हुए कहा कि अब से होने वाली शादियों में ग्रामीण लडके तथा लडकी दोनों की जन्म तिथि भी लिखे जिससे विवाह को लेकर कोई परेशानी न हो

उरमूल सीमान्त समिति, बज्जू, प्लान इंडिया तथा महिला एवं बाल विकास परियोजना कोलायत के संयुक्त तत्वाधान में ग्रामीणों को बाल विवाह तथा जन्म पंजीकरण को लेकर जागरूक किया जा रहा है। आज कोलायत न्यायिक मजिस्ट्रट नीरज गुप्ता, भूतपूर्व जिला प्रमुख पूर्णाराम चौहान, खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल वर्मा, बाल विकास परियोजना अधिकारी रामप्रसाद हर्ष ने निकटवर्ती कोटडी की राजकीय माध्यमिक विद्यालय में बाल विवाह को लेकर ग्रामीणेां को जानकारी दी। । पूर्व जला प्रमुख पूर्णाराम चौहान ने कहा कि बाल विवाह को ग्राम पंचायत स्तर पर ही रोका जा सकता है। ग्राम पंचायत में सरंपच को बाल विवाह को अपनी पंचायत मे रूकवाने के लिए भरसक प्रयास करने चाहिए। बाल विवाह जैसी कुप्रथा को अब ग्रामीण अपनी पंचायत से उखाडेंगे तभी देश तथा गांव की तरक्की हो सकती हैं। बाल विवाह को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यो की तारीफ करते हुए चौहान ने कहा कि प्रशासन को बाल विवाह रूकवाने में कोई फायदा नहीं है परन्तु बाल विवाह से आपके बच्चो की जिन्दगी खराब न हो इसके लिए प्रयासरत है। खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल वर्मा ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि विवाह जरूरी है पर बाल विवाह नहीं। शादी की उम्र को निश्चित किया गया है। उसके बाद ही शादी करवाएं। उन्हांेने कहा कि यदि आपके बच्चे पढे तो वह भी देश का नाम रौशन कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने मजिस्ट्रेट साहब का उदाहरण दिया। बाल विकास परियोजना अधिकारी रामप्रसाद हर्ष ने कहा कि बाल विवाह को रोकने के लिए ग्रामीणों को समझाया गया हैं। बाल विवाह दो परिवार तथा दो जिन्दगीयों को खराब कर देता है। उन्हेाने बाल विवाह को रूकवाने के लिए ग्रामीणों से भी अपील करते हुए कहा कि वह बाल विवाह को रोकने के लिए पूर्ण रूप से हमारा साथ दें। विद्यालय की हैड मैडम अन्जू जैन ने कहा कि जिस तरह मिट्टी के बने कच्चे घडे में पानी डालने से वह फूट जाता है उसी तरह लडकी को भी कम उम्र में शादी के बन्धन में बांध देने से उसका जीवन भी नष्ट हो जाता हैं। उन्होंने भी ग्रामीणों को बाल विवाह को मिटाने के लिए प्रयास करने को कहा। इस कार्यक्रम में महिला पर्यवेक्षक किरण भाटी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी ने भी सहयोग दिया।

Friday, October 28, 2011

विधिक साक्षरता

विधिक साक्षरता का अर्थ है कानून के बारे में समझ. इस ब्लॉग में आपको जन से जुड़े कानूनों के बारे मन समय-समय पर अवगत करवाएंगे.